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क्या सिजेरियन के बाद हो सकती है नॉर्मल डिलीवरी? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

किसी भी बात पर कोताही न बरतना मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.

क्या सिजेरियन के बाद हो सकती है नॉर्मल डिलीवरी? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सी-सेक्शन डिलीवरी (c-section delivery) के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

गर्भावस्था एक महिला के लिए जीवन भर याद रहने वाला समय होता है. इस समय उसके शरीर में तमाम बदलाव होते हैं. कभी वह गर्भवती ( consecutive pregnancies ) होने से बेहद खुश होती है तो कभी परेशान भी कि जल्दी से बस डिलीवरी हो जाए. आज की भागमभाग भरी जीवनशैली ने बहुत सी स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियां हो जाती हैं. लाइफस्टाइल के चलते महिलाओं के लिए और भी ज़्यादा दिक्कतें होती हैं. इसी बिज़ी वक्त में खुद को स्वस्थ्य रख पाना उनके लिए मुश्किल हो गया है और पहले की तरह नॉर्मल डिलीवरी करना नामुमकिन. ज्यादातर मामलों में gynecologist ऑपरेशन से डिलीवरी ( c-section delivery) करती हैं. इसके कई नुकसान होते हैं.

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लेकिन कई मामलों में अब महिलाएं अपना दूसरा बच्चा नॉमर्ल डिलीवरी (vaginal birth after cesarean, VBAC) से करना चाहती हैं. पर एक मिथ है कि पहला बच्चा अगर c-section से हुआ है तो दूसरे बच्चे का vaginal birth तकरीबन नामुमकिन होता है. जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है. चलिए हम आपको बताते हैं कि ऑपरेशन से डिलीवरी के बाद कैसे दूसरा बच्चा नॉर्मल डिलीवरी ( normal delivery or vaginal birth after cesarean) से हो सकता है. 

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हर महिला अपना सकती है VBAC.
Photo Credit: iStock

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सी-सेक्शन डिलीवरी (c-section delivery) के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इससे जुड़े कई सवालों पर सलाह लेने के लिए हम पहुंचे डॉक्टर बंदना सोधी के पास. उन्होंने बताया कि सिजेरियन के बाद अगर आप वजाइनल डिलीवरी करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा- 

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1. दोनों गर्भावस्थाओं के बीच का अंतर (The gap between the two pregnancies):

अगर आप सी-सेक्शन के बाद सामान्य डिलीवरी का विकल्प अपनाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले इस बात पर ध्यान देना होगा कि आपकी दोनों प्रेग्नेंसिज के बीच में कितना अंतराल है. कम से कम 18 महीने का अंतर होना जरूरी माना गया है. 
 

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2. नौंवे महीने में बच्चे का वजन (Weight of the baby in the 9th month):

अगर वजाइनल बर्थ का विकल्प चुनना है तो इसके लिए नौंवे माह में बच्चे के वजन पर नजर रखना जरूरी है. बच्चे का वजन काफी हद तक यह तय करता है कि डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन से.

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बच्चे का वजन डिलीवरी के तरीके को प्रभावित करता है.
Photo Credit: iStock

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3. बच्चे की स्थिति (Position of the baby): डिलीवरी के समय बच्चे का सिर नीचे की तरफ होना चाहिए. ऐसा न होने पर स्थिति cesarean delivery की ओर ज्यादा झुक जाती है.

4. पहली प्रेगनेंसी ( first pregnancy) के दौरान आखिर क्यों सिजेरियन करना पड़ा इसके पीछे के कारणों को भी नजर में रखा जाता है. इस बात का पूरा ध्यान दिया जाता है कि इस बार भी वही कारण न बने हुए हों.

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6. आपके पिछले घाव कितने भर चुके हैं इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. (Sex जीवन और सेक्स स्वास्थ्य से जुड़ी और खबरों के ल‍िए क्ल‍िक करें.)

किसी भी बात पर कोताही न बरतना मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए अगर आप सी-सेक्शन डिलीवरी (cesarean delivery) के बाद सामान्य डिलीवरी चाहती हैं तो अपनी डॉक्टर (Obstetrics and Gynaecology) से अच्छी तरह समझ लें कि आपके लिए यह कितना कारगर होगा और कितना नहीं.

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