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मेंटल डिसऑर्डर से जुड़ें हैं कई मिथक, जानें इनके बारे में

दुनिया भर में मेंटल डिसऑर्डर आम हो सकता हैं, लेकिन यह अभी भी विभिन्न मिथकों को घिरा हुआ है. ये मिथक लोगों को प्रोफेशनल मदद लेने से रोकते हैं, जो स्थिति को और खराब कर देता है और अक्सर लोगों को आत्महत्या की ओर भी ले जाता है. लोग इस पर खुलकर बात करने से भी बचते हैं.

मेंटल डिसऑर्डर से जुड़ें हैं कई मिथक, जानें इनके बारे में

मानसिक बीमारी का समय पर इलाज किया जाना आवश्यक है

दुनिया भर में मेंटल डिसऑर्डर आम हो सकता हैं, लेकिन यह अभी भी विभिन्न मिथकों को घिरा हुआ है. ये मिथक लोगों को प्रोफेशनल मदद लेने से रोकते हैं, जो स्थिति को और खराब कर देता है और अक्सर लोगों को आत्महत्या की ओर भी ले जाता है. लोग इस पर खुलकर बात करने से भी बचते हैं. आइए जानते हैं इन मिथकों के बारे में-

क्‍या आप सोचते हैं जरूरत से ज्‍यादा?

मानसिक बीमारी के लिए मदद मांगना गलत है


मानसिक बीमारी हमारे शरीर में किसी भी अन्य विकार के रूप में उभर सकती है. मानसिक विकार को अन्य विकार की तरह ठीक किया जा सकता है. मदद मांगना आपको क्रेजी नहीं बनाएगा, बल्कि यह आपकी ताकत दर्शाएगा. अगर आप भी इस बीमारी के शिकार हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्‍टर से सलाह लें.

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लाइलाज है मानसिक रोग
यह सबसे बड़ा मिथक है कि मानसिक बीमारी का मतलब मस्तिष्क में दोष से है, जिसे ठीक नहीं नहीं किया जा सकता है. हालांकि उचित इलाज से पीड़ित व्यक्ति हेल्‍दी लाइफ जी सकता है. यह संभव है कि बीमारी फिर से शुरू हो सकती है, लेकिन उपचार से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है.

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कम होता है मानसिक विकार रोगियों का आईक्यू
कई शोधकर्ताओं ने पाया है कि मेंटल डिसऑर्डर में रोगी का आईक्‍यू औसत या कभी-कभी औसत भी अधिक होता है. व्‍यक्ति में सीखने की अक्षमता हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप कम आईक्यू होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बहुत व्यापक है. कभी-कभी, बाइपोलर डिसआर्डर, ऐंगजाइअटी या डिप्रेशर से ग्रस्त बच्चे बहुत अच्छा और अत्यधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं.

क्रेजी होते हैं मानसिक रूप से बीमार लोग
मानसिक विकारों को एक अनोखी बीमारी नहीं कहा जा सकता. ये कई प्रकारों की होती है. सीखने में अक्षमता बाइपोलर डिसआर्डर हो सकता है, यह मानसिक बीमारी का एक हिस्सा है. क्रेजी होने का अर्थ है, कोई व्यक्ति जो वास्तविकता को उसी तरह से नहीं देख सकता है जैसे बाकी लोग देखते हैं.

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मानसिक रूप से बीमार सभी लोग हिंसक और खतरनाक होते हैं
मानसिक रूप से बीमार लोगों की तुलना हिंसक या खतरनाक होने से नहीं की जा सकती. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे व्‍यक्ति के लिए खतरनाक होने से ज्यादा घटनाओं के शिकार होने का खतरा अधिक रहता है. इस रिसर्च में यह भी कहा गया कि केवल 7 फीसदी हिंसक कार्य मानसिक रोगी द्वारा किए जाते हैं.

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व्‍यस्‍कों को होती है मेंटल प्रोब्‍लम

तनाव और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों से संबंधित कुछ लक्षण वयस्कों में अधिक दिखाई देते हैं, क्‍योंकि वह अपने जीवन में अधिक चीजों का अनुभव कर चुके होते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि यह एक वयस्क समस्या है. तथ्यों के अनुसार, मेंटल हेल्‍थ प्रोब्‍लम वाले 50 फीसदी वयस्कों में, 14 साल की उम्र से सबसे पहले इसके लक्षण दिखाई देते हैं, उम्र बढ़ने के दौरान लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं, जिससे यह एक बड़ी समस्या बन जाती है.

अपराध या आशीर्वाद से जुड़े नहीं हैं मानसिक विकार
मेंटल हेल्‍थ प्रोब्‍लम का अपराध या आशीर्वाद से कोई लेना-देना नहीं है. हर प्रकार के डिसऑर्डर के अलग लक्षण होते हैं. आइए इसके कुछ उदाहरण जानते हैं:

  • मानसिक विकार जेनेटिक हो सकता है. उदाहरण के लिए, ऑटिज़्म फ़्रेजाइल एक्स सिंड्रोम के कारण हो सकता है जो एक प्रकार का आनुवांशिक विकार है.
  • स्‍ट्रेस या बुरे अनुभव मानसिक विकार का परिणाम हो सकते हैं

कम होती है मानसिक रोगी में इच्‍छाशक्ति
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि केवल कम इच्छाशक्ति वाला व्यक्ति ही मानसिक बीमारी से पीड़ित हो सकता है. लेकिन यह सच नहीं है, क्योंकि मानसिक बीमारियां किसी व्यक्ति की ताकत को नहीं, बल्कि मस्तिष्क में दोषों को दर्शाती है.

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मानसिक बीमारी वाले व्यक्ति की मदद कोई नहीं कर सकता
मानसिक रूप से बीमार व्‍यक्ति जल्दी ठीक हो सकते हैं, अगर उन्‍हें अपने आसपास के लोगों का साथ मिलने लगे. हम किसी बीमारी का इलाज नहीं कर सकते, लेकिन निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति से सही व्‍यव्‍हार करके उनकी मदद कर सकते हैं. 

  • उन्‍हें यह समझने में मदद करें कि वह क्रेजी नहीं हैं.
  • उन्‍हें यह अहसास न होने दें कि वह दूसरे लोगों से अलग हैं.
  • उन्‍हें उसी तरह से समर्थन दें जैसे वह चाहते हैं.
  • उन्‍हें यह समझाएं कि आप हमेशा उनके साथ हैं.

थेरेपी से नहीं किया जा सकता मानसिक विकारों का इलाज
थेरेपी से भी कई मानसिक विकारों का उपचार पूरी तरह से किया जा सकता है, जबकि कुछ को इसके साथ दवाओं की आवश्यकता होती है. थेरेपी मानसिक समस्याओं जैसे चिंता या अवसाद का इलाज करने में मदद कर सकती है, लेकिन कुछ मानसिक विकारों में, लोगों को इसके साथ एंटीसाइकोटिक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है.

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