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क्‍या आप सोचते हैं जरूरत से ज्‍यादा?

सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि अधिक सोचने या अति-विचारक (overthinking) होने का मतलब क्या है? जब आप बिना कुछ किए जरूरत से ज्‍यादा चिंता करने लगते हैं, तो आप अत्‍यधिक सोचते हैं. विचारों की पुनरावृत्ति, जो आपकी सामान्य गतिविधियों में रूकावट पैदा करने लगती है, को भी अत्‍यधिक सोचना कहा जाता है. दिन में हमें हमारा दिमाग सक्रिय रखता है, लेकिन यह दो तरह से बंटकर काम करता है-पहला जागृत होकर और दूसरा अवचेतन रूप से.

क्‍या आप सोचते हैं जरूरत से ज्‍यादा?

अति-विचारक के प्रकार

सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि अधिक सोचने या अति-विचारक (overthinking) होने का मतलब क्या है? जब आप बिना कुछ किए जरूरत से ज्‍यादा चिंता करने लगते हैं, तो आप अत्‍यधिक सोचते हैं. विचारों की पुनरावृत्ति, जो आपकी सामान्य गतिविधियों में रूकावट पैदा करने लगती है, को भी अत्‍यधिक सोचना कहा जाता है. दिन में हमें हमारा दिमाग सक्रिय रखता है, लेकिन यह दो तरह से बंटकर काम करता है-पहला जागृत होकर और दूसरा अवचेतन रूप से. सोते समय हम कोई काम नहीं कर रहे होते, तो मस्तिष्क अवचेतन रूप से काम करने लगता है, लेकिन यदि आप दिन में हर समय बिना आराम के सोचने का प्रयास करते हैं, तो इससे हमारा मस्तिष्क सही तरह से काम नहीं कर पाता. इसके दो कारण हो सकते हैं:

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  • जो हुआ है, उस पर विचार करना- जब कोई अपने अतीत में घटित घटना के बारे में सोचना शुरू करता है, तो हमारी सोच इसके नतीजे पर हावी होने लगती है, जिससे वर्तमान पर ध्यान देना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है.
  • आने वाली चीजों के बारे में चिंता करना- अतीत के बारे में चिंतन (overthinking) करने की तरह, लोगों को आमतौर पर अपने भविष्य के बारे में इतनी चिंता होती है कि वे वर्तमान में क्या हो रहा है, इस पर ध्‍यान ही नहीं देते.

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क्या है जो आपको एक अति-विचारक बनाता है?

लोग अपने आसपास घटित होने वाली कई तरह की घटनाओं के बारे में सोचकर अति-विचारक हो जाते हैं. ये घटनाएं निम्‍न प्रकार की हो सकती हैं:

  •  जब आप किसी व्यक्ति से झगड़ते हैं, तो आप ये सोचकर चिंतित होने लगते हैं कि आपने अपनी किसी बात से उसका दिल तो नहीं दुखाया.
  • जब आप किसी से तर्क-वितर्क करते समय विफल हो जाते हैं, तो आप ये सोचने लगते हैं कि आप इसमें कैसे विजयी हो सकते थे.
  • आप उन चीजों के बारे में सोचते हैं जो आपके कंट्रोल में नहीं हैं.
  • आप लोगों के उद्देश्यों के पीछे की मंशा तलाशना चाहते हैं कि वे क्या कहते हैं या वे कैसे काम करते हैं.
  • आप उन चीजों की कामना करते हैं, जिन्हें आप किसी के साथ मिलकर बेहतर कर सकते हैं.
  • कभी-कभी आप ‘किंतु' और ‘परंतु' में उलझे रहे जाते हैं.
  • आप अपने द्वारा लिए गए गलत फैसलों के बारे में सोचने लगते हैं.
  • आप खुद ही अपने आपको अतीत में रहने के लिए विवश करते हैं.

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अति-विचारक होने से कैसे बचें?

आप इन संकेतों और लक्षणों का निरीक्षण कर सकते हैं. बहुत सारे लोग हैं जो ऐसा ही महसूस करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह लाइलाज है. ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अति-विचारक होने से बच सकते हैं.

1.    समस्या के समाधान का अभ्‍यास करें

आप समस्या के समाधान के लिए कुछ खास तकनीकों को अपना सकते हैं. किसी समस्या के बारे में सोचते समय, बिना अति-विचारक बने यह अनुमान लगाने का समय निकालें कि आप इस मुद्दे को कैसे हल कर सकते हैं.

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2. अपने विचारों पर चिंतन करें

आप इस बारे में निर्णय लेने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या वास्तव में कुछ समस्‍याओं को कंट्रोल करना आपके हाथों में है या नहीं. यह रणनीति आपको विचारों को कम करने में मदद करती है.

3.    सोचते समय खुद को परखें

एक बार जब आप खुद को बेहतर तरीके से पहचानना सीख जाते हैं और यह जान लेते हैं कि आप परिस्थितियों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, तो आप जल्द ही यह महसूस करेंगे कि आप जो कुछ भी करते हैं, उसके बारे में अत्‍यधिक सोचना सही नहीं है.

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4.    मैडिटेशन

शोधकर्ताओं का कहना है कि मैडिटेशन से आप प्रभावी ढंग से अपने मन को शांत कर सकते हैं. इससे आपको उन विचारों से खुद को अलग करने में मदद मिलेगी, जो आपके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं. दिन में कम से कम 20 मिनट मैडिटेशन करने से आप शांत रह सकते हैं और अच्छी तरह सोच सकते हैं.

5. दूसरी चीजों में ध्‍यान लगाएं:

उन चीजों से अपना ध्यान हटाएं, जो आपको परेशान करती हैं. यह अत्‍यधिक सोच की प्रवृत्ति से निपटने के लिए एक प्रभावी रणनीति हो सकती है. आप गेम्‍स खेलकर, आर्ट बनाकर, स्विमिंग करके या इसी तरह की विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा बनकर ऐसा कर सकते हैं.

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6.    सलाह/मशविरा लें

आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि जब आप किसी चीज़ के बारे में सोच रहे होते हैं, तो आपकी बातों को सुनने के लिए हमेशा कोई न कोई होता है. अपने विचारों को उन लोगों के साथ साझा करें, जिन पर आप भरोसा करते हैं और उनकी सकारात्मक राय का सम्मान करना सीखें.

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