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Heart Attack Vs Cardiac Arrest: हार्ट अटैक (दिल के दौरे) और कार्डियक अरेस्ट में क्या फर्क है

Heart Attack Vs Cardiac Arrest: मंगलवार रात हृदय गति रुकने से यानी कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) के कारण देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) का निधन हो गया. अक्सर हम कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक (Heart Attack) को एक ही मान लेते हैं. लेकिन हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में काफी अंतर है.

Heart Attack Vs Cardiac Arrest: हार्ट अटैक (दिल के दौरे) और कार्डियक अरेस्ट में क्या फर्क है

Heart Attack Vs Cardiac Arrest: हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में काफी अंतर है.

खास बातें

  1. अक्सर हम कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही मान लेते हैं.
  2. हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में काफी अंतर है.
  3. कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से अलग और ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.

Heart Attack Vs Cardiac Arrest: देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) का मंगलवार रात हृदय गति रुकने से यानी कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) के कारण निधन हो गया. वह 67 वर्ष की थीं. भाजपा की वरिष्ठ नेता लंबे समय से सेहज से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही थीं. उनका 2016 में गुर्दा प्रतिरोपित (Kidney Transplant) भी किया गया था. एम्स (AIIMS) के चिकित्सकों ने बताया कि हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया. शुरुआती खबरों में कहा गया था कि सुषमा स्वराज का निधन हार्ट अटैक (Heart attack) के कारण हुआ, लेकिन बाद में पता चला कि यह हार्ट अटैक नहीं कार्डियक अरेस्ट यानी हृदय गति रुकने से हुआ. अक्सर हम कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक (Heart Attack And Cardiac Arrest are Same?)को एक ही मान लेते हैं. लेकिन हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में काफी अंतर है. दिल का दौरा पड़ना दरअसल हार्ट अटैक कहलाता है, और कार्डियक अरेस्ट इससे अलग और ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. आइए, समझते हैं, दोनों में क्या अंतर है. 

Heart Attack: क्या है हार्ट अटैक के कारण और सावधानियां

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या फर्क है | Heart Attack And Cardiac Arrest Difference


क्या होता है दिल का दौरा या हार्ट अटैक 

दिल का दौरा एक मेडिकल इमरजेंसी है. सरल शब्दों में कहें दिल का दौरा उस स्थिति को कहा जाता है जब दिल की नसों में खून का कोई थक्का अटक जाया हृदय की ओर रक्त के बहाव को रोक देता है. ऐसा होने से दिल तक खून की सप्लाई नहीं हो पाती और शरीर के बाकी हिस्सों में भी खून नहीं पहुंच पाता. रक्त ही शरीर के अंगों तक ऑक्सिजन का प्रवाह करता है. ऐसे में रक्त के बिना अंगो को ऑक्सिजन नहीं मिल पाती और वह एक एक कर मरने लगते हैं. 

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हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ने के लक्षण 

- दिल का दौरा पड़ने पर छाती में तेज दर्द महसूस होता है. 
- गर्दन, पीठ और सीधे हाथ में खिंचाव और दर्द होता है. 
- अचानक से शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है. 
- मरीज को चक्कर या उल्टी की शिकायत भी हो जाती है. 

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Heart Attack And Cardiac Arrest: कार्डियक अरेस्ट इससे अलग और ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. Photo Credit: iStock

कब होता है हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन

हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन कई वजहों से हो सकता है. लेकिन सही स्थिति में यह तब माना जाता है, जब शरीर की कोरोनरी आर्टरी में अचानक ब्लॉकेज हो जाए. कोरोनरी आर्टरी से दिल की पेशियों तक खून पहुंचता है. ऐसे में जब दिल तक खून की सप्लाई बंद हो जाती है, तो यह निष्क्रिय हो जाती हैं. तो कुल मिलाकर हार्ट अटैक वह स्थिति है जब दिल की कुछ नसें काम करना बंद कर देती हैं.

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क्या होता है कार्डियक अरेस्ट

कार्डियक अरेस्ट वह स्थिति है जब दिल के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा हो जाए. आम शब्दों में कहें तो दिल के अलग-अलग हिस्सों के बीच जब रक्त के संचार में कोई दिक्कत आए या किसी अन्य कारण से दिल की धड़कन रुक जाती है. ऐसे में व्यक्ति की तुरंत मृत्यु हो जाती है. यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक होता है. इसके इलाज के लिए मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है, जिससे उसकी उसकी हृदयगति को नियमित किया जा सके. मरीज को 'डिफाइब्रिलेटर' से बिजली का झटका दिया जाता है, जिससे दिल की धड़कन को नियमित होने में मदद मिलती है.

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किन लोगों को होता है कार्डिएय अरेस्ट का खतरा 

वे लोग जो पहले से दिल की बीमारी से जूझ रहे हों या हार्ट से जुड़ी किसी समस्या का सामना कर रहे हों या हार्ट अटैक के मरीज रहे हों, में कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक होता है. अगर किसी के परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है, तो भी उन्हें सावधान रहना चाहिए.

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