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ब्रेस्‍ट कैंसर: जानिए इसके कारण और रोकथाम के उपाय

भारत में ब्रेस्‍ट कैंसर (breast cancer) पर बात करने से अकसर लोग कतराते हैं. पर क्‍या आप जानते हैं दुनियाभर में सबसे ज्‍यादा भारतीय महिलाएं इस बीमारी का शिकार हैं.

ब्रेस्‍ट कैंसर: जानिए इसके कारण और रोकथाम के उपाय

कैंसर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलता है.

भारत में ब्रेस्‍ट कैंसर (breast cancer) पर बात करने से अकसर लोग कतराते हैं. पर क्‍या आप जानते हैं दुनियाभर में सबसे ज्‍यादा भारतीय महिलाएं इस बीमारी का शिकार हैं. स्तन कैंसर के लक्षणों में ब्रेस्‍ट या बगल में गांठ बन जाना, ब्रेस्‍ट से खून आना, स्तन की त्वचा पर धब्बे पड़ना, दर्द होना, गले या बगल में लिम्फ नोड्स के कारण सूजन होना आदि प्रमुख हैं. ऐसे में समय रहते जागरूक रहना ही इससे बचने का एकमादत्र उपाय है. आइए जानते हैं कि इस बीमारी के क्‍या-क्‍या लक्षण हैं.

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कैंसर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलता है. किसी व्यक्ति में कैंसर का खतरा उस समय अधिक बढ़ जाता है, जब उसके परिवार के एक या अधिक सदस्य इस बीमारी से पीड़ित हों.


ब्रेस्‍ट कैंसर आनुवंशिक भी होता है. व्यक्ति में वह जीन मौजूद हो सकते हैं, जो सामान्य कोशिकाओं को कैंसर कर सकते हैं.

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जिन महिलाओं को 12 वर्ष की उम्र से पहले मासिक धर्म शुरू हो जाता है या 55 साल के बाद रुक जाता है, उनमें ब्रेस्‍ट कैंसर होने का खतरा अधिक होता है.

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जो महिलाएं बच्चे पैदा नहीं कर पा रही हैं या जिनके बच्‍चे देरी से हुए हैं (आमतौर पर 30 साल की उम्र के बाद) उनमें भी ब्रेस्‍ट कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है.

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मोटापा एक ऐसी स्थिति है जो ब्रेस्‍ट कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है.

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अधिक अल्‍कोहल लेना और एक्‍सरसाइज कम करना जैसे अन्य कारक भी ब्रेस्‍ट कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं.

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पर्यावरणीय कारणों जैसे कि हानिकारक विकिरण, सिगरेट के धुएं के संपर्क में लंबे समय तक रहना और कीटनाशक भी ब्रेस्‍ट कैंसर होने के कारण हो सकते हैं.

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कुछ मामलों में जो महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से करा चुकी है उनमें ब्रेस्‍ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

कुछ मामलों में, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से गुजरने वाली महिलाओं में ब्रेस्‍ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

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मोटापा एक ऐसी स्थिति है, जो ब्रेस्‍ट कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है. अपने बॉडी का एक्‍स्‍ट्रा वेट कम करके, आप ब्रेस्‍ट कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं.

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20 साल की उम्र से ही हर महीने अपने स्तनों की जांच करना शुरू कर दें. खुद ब्रेस्‍ट की जांच करने के लिए अपने डॉक्टर से भी सलाह लेनी चाहिए.

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अल्‍कोहल लेने और ब्रेस्‍ट कैंसर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. ब्रेस्‍ट कैंसर से खुद को बचाने के लिए, दिन में केवल एक बार अल्‍कोहल लें या इससे पूरी तरह बचें.

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वैज्ञानिकों ने हाल ही में एंटीबायोटिक के उपयोग और ब्रेस्‍ट कैंसर के बीच की कड़ी का खुलासा किया है. लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं का इस्‍तेमाल करने से ब्रेस्‍ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

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एक्‍स्‍पर्ट कहते हैं कि वसायुक्त टीश्‍यू में एस्ट्रोजन का प्रोडक्‍शन मोटापे और ब्रेस्‍ट कैंसर के जोखिम के बीच की कड़ी हो सकता है. ऐसे में आपको बैलेंस्‍ड और पौष्टिक डाइट लेनी चाहिए.  

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