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Non-alcoholic Fatty Liver: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर से हैं परेशान, तो आज ही जान लें क्या खाएं और क्या नहीं!

Non-alcoholic Fatty Liver Diet: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग एक ऐसी स्थिति है जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम से निकटता से जोड़ा जा सकता है. इंसुलिन रेजिस्टेंट, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल इस स्थिति को बिगाड़ सकते हैं. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर के लिए कुछ फूड्स (Foods For Fatty Liver) का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है, कुछ इसे ट्रिगर कर सकते हैं.

Non-alcoholic Fatty Liver: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर से हैं परेशान, तो आज ही जान लें क्या खाएं और क्या नहीं!

Non-alcoholic Fatty Liver: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग किसी भी उम्र में हो सकता है

खास बातें

  1. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग किसी भी उम्र में हो सकता है.
  2. गंभीर मामलों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग लीवर फेल्योर का कारण बनात है
  3. फैटी लीवर में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए?

Do's And Don'ts Of Fatty Liver: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग किसी भी उम्र में हो सकता है. फैटी लीवर रोग (Fatty Liver Disease) लीवर में सूजन का एक परिणाम है, जो कई और बीमारियों का भी कारण बन सकता है. अगर फैटी लीवर का इलाज (Fatty Liver Treatment) नहीं किया जाए तो यह आपको लंबे समय तक परेशान कर सकता है और लीवर के फैल्योर का कारण (Cause Liver Failure) बन सकता है. गंभीर मामलों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग लीवर फेल्योर के साथ लीवर सिरोसिस के जोखिम में भी डाल सकता है. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग (Non-alcoholic Fatty Liver) एक ऐसी स्थिति है जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम से निकटता से जोड़ा जा सकता है. इंसुलिन रेजिस्टेंट, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल इस स्थिति को बिगाड़ सकते हैं. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर के लिए कुछ फूड्स (Foods For Fatty Liver) का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है, कुछ इसे ट्रिगर कर सकते हैं. यहां जानें आपको फैटी लीवर में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए.

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नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका एक स्वस्थ जीवन शैली है. आदर्श रूप से, आपको ऐसे फूड्स का सेवन करना चाहिए जो सूजन को कम करते हैं और आपके शरीर को इंसुलिन का उपयोग करना आसान बनाते हैं- 

1. पत्तेदार साग

डाइट में पत्तेदार साग को शामिल करके फैटी लीवर को रोका जा सकता है और इसका इलाज भी किया जा सकता है. अध्ययनों से पता चलता है कि अपने आहार में ब्रोकोली सहित अन्य पत्तेदार साग जैसे केल, पालक और ब्रसेल स्प्राउट्स शामिल करने से लीवर में वसा के निर्माण को रोक सकता है.

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2. डाइट में हेल्दी फैट शामिल करें

ग्लूकोज, एक प्रकार की शुगर, ऊर्जा के लिए कोशिकाओं द्वारा उपयोग किया जाता है. इंसुलिन एक हार्मोन है जो ग्लूकोज को पचाने वाले भोजन से कोशिकाओं में जाने में मदद करता है. फैटी लीवर रोग वाले लोग अक्सर इंसुलिन प्रतिरोधी होते हैं - एक ऐसी स्थिति जिसमें इंसुलिन अच्छी तरह से काम नहीं करता है. कुछ वसा इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड (मछली, वनस्पति तेल, फ्लैक्सीड्स और अखरोट), और एवोकैडो, जैतून का तेल और मोनोअनसैचुरेटेड फैट जैसे फैट के अच्छे प्रकार शामिल हैं.

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3. लहसुन

यह वजन घटाने और रक्तचाप को कम करने वाले गुणों से भरपूर है. लहसुन फैटी लीवर की बीमारी को रोकने में भी सहायक हो सकता है. अपने आहार में लहसुन को शामिल करने से नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग वाले लोगों में वसा कम हो सकती है.

4. सही कार्ब्स खाएं

रिफाइंड कार्ब्स से बचना चाहिए. वसायुक्त भोजन, मिठाइयां, वातित पेय, पैक्ड फ्रूट जूस, सॉस, पास्ता इत्यादि को फैटी लीवर से बचाने के लिए जरूरी है. आप साबूत गेहूं, बीन्स और दाल जैसे अधिक जटिल या फाइबर युक्त कार्ब्स का विकल्प चुन सकते हैं.

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5. ग्रीन टी

ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं और फैटी लीवर को भी ठीक रखते हैं. वजन घटाने को बढ़ावा देने से लेकर कोलेस्ट्रॉल कम करने तक, ग्रीन टी के कई फायदे हैं जिन्हें आप मिस नहीं कर सकते हैं.

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6. शराब से बचें

शराब का सेवन फैटी लीवर रोग को ट्रिगर कर सकता है. फैटी लीवर से बचने का सबसे अच्छा तरीका शराब का सेवन न करना है. शराब शरीर के लिए हानिकारक है. इसके सेवन से सभी परिस्थितियों में बचना चाहिए.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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