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बॉर्डरलाइन बाइपोलर डिसऑर्डर और बाइपोलर डिसऑर्डर में क्‍या है अंतर

बीपीडी एक प्रकार का पर्सनालिटी डिसऑर्डर है, जिसमें किसी व्यक्ति के प्रति अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया को छिपाना मुश्किल होता है. बीपीडी वाले लोग अपनी भावनाओं को विनियमित करने में असमर्थ होते हैं और खुद को सही ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं.

बॉर्डरलाइन बाइपोलर डिसऑर्डर और बाइपोलर डिसऑर्डर में क्‍या है अंतर

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर और बाइपोलर डिसऑर्डर दोनों अलग-अलग प्रकार की बीमारियां हैं, जिसके कुछ लक्षण एक जैसे होते हैं. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि इन दोनों के अंतर को बताने वाले इसके मनोवैज्ञानिक परीक्षण नहीं हो सकते हैं. इन दोनों विकारों में कुछ सामान्य लक्षण हैं जैसे कि आवेगी या अवसादग्रस्तता या बार-बार मूड बदलाना.

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क्‍या है बॉर्डरलाइन बाइपोलर डिसऑर्डर (बीपीडी)?
बीपीडी एक प्रकार का पर्सनालिटी डिसऑर्डर है, जिसमें किसी व्यक्ति के प्रति अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया को छिपाना मुश्किल होता है. बीपीडी वाले लोग अपनी भावनाओं को विनियमित करने में असमर्थ होते हैं और खुद को सही ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता के साथ लड़ाई करता है और माता-पिता लड़ाई के बाद बच्चे को लाड़-प्यार नहीं करते हैं, तो बीपीडी वाले व्यक्ति को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है.


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बाइपोलर डिसऑर्डर के कई लक्षण हो सकते हैं:

1. लोगों का सामना करने में डर
2. खुद को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतें करना
3. अकेले होने का डर
4. स्वयं और दूसरों की भावनाओं को न समझना
5. अलग होने की चिंता
6. इरेटिक सेल्फिमेज

बीपीडी का ट्रीटमेंट

रोगी के मनोवैज्ञानिक इंटरव्‍यू और मूल्यांकन के बिना इसका निदान नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह विभिन्न अन्य प्रकार की मानसिक बीमारियों से संबंधित है. सीबीटी-संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी या एसएफटी- स्कीमा फोकस्ड थेरेपी और एसएसआरआई और एंटीसाइकोटिक दवाओं जैसे माध्यम से इसका इलाज किया जा सकता है.

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बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है?
बाइपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार का मूड डिसऑर्डर है, जिसे उन्माद और हाइपोमेनिया के रूप में समझा जा सकता है. ये दोनों समस्‍याएं दिनों से लेकर महीनों तक हो सकती हैं. व्यक्ति का मूड बार-बार बदल सकता है, वह ऊर्जा से भरा महसूस कर सकता है. इस दौरान, लोग पूरे दिन और रात में बहुत कुछ करते हैं, पर थकते नहीं हैं. रोगी का यह स्‍वभाव लंबे समय तक जारी रह सकता है. आपके व्यवहार में बदलाव हाइपोमेनिक भी हो सकता है, इसमें व्यक्ति कम ऊर्जा के साथ उदास महसूस कर सकता है. नींद आना और कुछ भी नहीं करने करना, बाइपोलर डिसऑर्डर से संबंधित लक्षण हो सकते हैं.

इसके लक्षण हैं:

1. एकदम से खुश या उदास होना
2. एकदम नींद आना अनिद्रा महसूस होना
3. जल्‍द गुस्‍सा आना
4. महत्वहीन और दुखी महसूस करना
5. चिंतन करने में परेशानी
6. बहुत ज्यादा या बिल्कुल नहीं खाना
7. बेकार की चीजों पर बहुत पैसा खर्च करना
8. चीजों को भूलना

बाइपोलर डिसऑर्डश्र का ट्रीटमेंट

यह देखा गया है, कि बाइपोलर डिसऑर्डर वाले लोगों को हाइपोमेनिक या अवसादग्रस्तता के दौरान मदद लेने की संभावना होती है, इस प्रकार, एमएचपी मानसिक स्वास्थ्य की जांच करके, फैमिली फोकस्ड थेरेपी जैसे ईसीटी द्वारा रोगी को मदद दी जाती है. रोगी को इलेक्ट्रोकोनवल्सी थेरेपी या साइको-एजुकेशन और कुछ दवाएं, जिनमें मूड स्टेबलाइजर्स और एंटीडिपेंटेंट्स शामिल हैं, दी जाती हैं.

बॉर्डरलाइन पर्सानालिटी डिसऑर्डर बनाम बाइपोलर डिसऑर्डर

  • बीपीडी एक पर्सनालिटी डिसऑर्डर है वहीं बाइपोलर डिसऑर्डर मूड से जुड़ा हुआ है.
  • बीपीडी थोड़े समय के लिए होता है, जबकि बाइपोलर डिसऑर्डर लम्‍बे समय तक बना रहता है.
  • बाइपोलर डिसऑर्डर अलग-अलग तरह से सोने या सोच के कारण होता है, हालांकि बीपीडी में जीवन की घटनाएं अधिक महत्‍वपूर्ण होती हैं.
  • बीपीडी की तुलना में बाइपोलर डिसऑर्डर में मूड स्‍विंग अधिक होते हैं.

इसलिए, इन दोनों विकारों के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, पर दोनों बीमारियां अलग-अलग हैं.

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