विश्व में पांच करोड़ से ज्यादा और भारत में 40 लाख से अधिक लोग डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित है. डिमेंशिया का अब तक मेडिकल साइंस में इलाज नहीं खोजा जा सका है, ऐसे में डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित मरीज को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है.

जब दिमाग की कोशिकाएं किन्हीं कारणों से डैमेज हो जाती है तो डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है.
आज के समय में लोगों में भूलने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. रोजमर्रा के कामों में भूलने की बीमारी के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. भूलने की इस बीमारी को डिमेंशिया कहा जाता है. इस बीमारी के चलते याददाश्त कम हो जाती है. उम्र बढ़ने के साथ ही इस डिमेंशिया असर बढ़ता जाता है. इस बीमारी असर सीधे दिमाग से जुड़ा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट डिमेंशिया को लेकर कहते है, कि यह बीमारी एक लक्षणों का समूह होता है जो सीधे तौर पर दिमाग से संबंधित होता है. Dementia शब्द De और mentia शब्दों से मिलकर बना है. जिसमें De का मतलब without और mentia का मतलब mind होता है. डिमेंशिया बीमारी के पीड़ित व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक पहलू पर इसका असर होता है. डिमेंशिया के प्रकार, लक्षण, कारण और इलाज से संबंधित सभी जानकारियां हम आपको यहां दे रहे है.
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डिमेंशिया के लक्षण –
- याददाश्त कमजोर हो जाना
- जरूरी बातों को भूल जाना
- सोचने में परेशानी - छोटी - बड़ी परेशानी को सुलझा ना पाना
- रास्ते याद न रख पाना, भटक जाना
- तस्वीर देखकर उसके बारे में ना समझ पाना
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
- फीलिंग्स पर कंट्रोल नहीं - गिनती न कर पाना
ये सभी डिमेंशिया बीमारी के शुरुआती लक्षण होते है, समय के साथ ये लक्षण और ज्यादा गंभीर हो जाते है और पीड़ित व्यक्ति दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर हो जाता है.
डिमेंशिया के कारण - जब दिमाग की कोशिकाएं किन्हीं कारणों से डैमेज हो जाती है तो डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है. कोशिकाएं डैमेज होने से पीड़ित व्यक्ति की सोच, फीलिंग्स और भावनाओं पर असर पड़ता है. - सिर पर चोट लगने से भी डिमेंशिया बीमारी हो सकती है. - स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर और एचआईवी इन्फेक्शन के कारण डिमेंशिया बीमारी हो सकती है.
डिमेंशिया के प्रकार –
अल्जाइमर – अल्जाइमर डिमेंशिया का आम प्रकार है. इस रोग के कारण दिमाग में परिवर्तन होता है. अल्जाइमर में ऐसे प्रोटीन का निर्माण होता है, जिसके कारण तंत्रिका को नुकसान पहुंचता है और पीड़ित व्यक्ति के दिमाग का आकार घटने लगता है.
लेवी बॉडी डिमेंशिया – लेवी बॉडी डिमेंशिया कोर्टेक्स में alpha-synuclein (प्रोटीन) इकट्ठा होने के कारण होता है. डिमेंशिया के इस प्रकार में याददाश्त में कमी, वहम और असंतुलन का सामना करना पड़ता है.
पार्किंसन रोग – यह डिमेंशिया की न्यूरोडीजेनेरेटिव अवस्था है, इस परिस्थिति में तंत्रिका तंत्र को बहुत नुकसान पहुंचता है. डिमेंशिया के इस प्रकार(पार्किंसन) में गाड़ी चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
मिश्रित डिमेंशिया – मिश्रित डिमेंशिया में व्यक्ति को एक ही समय में अल्जाइमर और दूसरी तरह का डिमेंशिया एक साथ हो जाता है.
फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया – फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया में पीड़ित व्यक्ति के व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव आ जाता है. इस बीमारी के चलते मरीज को बोलने और समझने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है.
डिमेंशिया का इलाज – मेडिकल साइंस ने समय के साथ बहुत प्रगति कर ली है, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि अब तक विशेषज्ञ डिमेंशिया का संपूर्ण इलाज नहीं खोज सके है. डिमेंशिया में दिमाग में होने वाले नुकसान को रोकने और कोशिकाओं को नष्ट होने बचाने के लिए दवाओं फर फिलहाल शोध ही चल रहा है. लेकिन कुछ दवाओं जरूर है. जिनकी मदद से डिमेंशिया के लक्षण को अस्थायी तौर पर सुधारने की कोशिश की जा सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह पर मिलने वाली ये दवाएं न्यूरोट्रांसमीटर्स को बढ़ाने में मदद करती हैं. इसके अलावा डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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