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शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें मानसून में कैसे रखें सेहत का ख्याल, क्या खाएं क्या नहीं

ख़राब वैक्टीरिया से मुकाबला करने के लिए ज़रूरी है कि शरीर में अच्छे वैक्टीरिया शरीर की मात्रा को बढ़ाया जाए. ये कोई चौंकने वाली बात नहीं है, क्योंकि बैक्टीरिया हमेशा ख़राब नहीं होते.

शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें मानसून में कैसे रखें सेहत का ख्याल, क्या खाएं क्या नहीं

जानें सावन यानी मानसून में क्या खाएं और क्या नहीं

मॉनसून कब आएगा? यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा होगा. लेकिन बरसात ने दस्तखत तो दे दी है और बारिश और मॉनसून (Monsoon) का सीजन तो शुरू हो ही चुका है. बरसात का इंतजार किसे नहीं होता आखिर बारिश गर्मी से राहत जो दिलाती है. लेकिन गर्मी से राहत के साथ ही सावन (Sawan 2019) के मौसम में मच्छर और कई तरह के संक्रमण भी बढ़ जाते हैं. इस मौसम में जगह-जगह होने वाले जलभराव के चलते कई तरह की बीमारियां फैल जाती हैं. यही वजह है कि इस मौसम में आपको अपने खान-पान का खास ध्यान रखना होता है. खानपान से जुड़ी एक समस्या यह है कि इस मौसम में कुछ चीज़ें खुद ब ख़ुद हमारी आदतों में शुमार हो जाती हैं. ये वो चीज़ें हैं जो स्वास्थ्य के नज़रिए से हमारे लिए ठीक नहीं हैं. मॉनसून में हम चाय और पकौड़े के आदी बन जाते हैं, इसके साथ ही तीखी कचौरी भी हमारी डाइट का इन दिनों हिस्सा बन जाती है. लेकिन क्योंकि इस मौसम में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है, जिससे शरीर के बैक्टीरिया के चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है. तो इस मौसम में हमें अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है. 

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खाने में शामिल करें गुड बैक्टीरिया


मॉनसून के मौसम में पर्यावरण में मौजूद नमी की वज़ह से बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीव आसानी से पनपते हैं, इन बैक्टीरिया की वज़ह से हमारी पाचन शक्ति पर भी असर पड़ने लगता है.  ख़राब वैक्टीरिया से मुकाबला करने के लिए ज़रूरी है कि शरीर में अच्छे वैक्टीरिया शरीर की मात्रा को बढ़ाया जाए. ये कोई चौंकने वाली बात नहीं है, क्योंकि बैक्टीरिया हमेशा ख़राब नहीं होते. गट फ्लोरा, माइक्रोबायोटा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल माइक्रोबायोटा वो सूक्ष्म जीव हैं जो हमारे पाचन तंत्र में होते हैं. मानसून में शरीर की अतिरिक्त देखभाल आपको स्वस्थ्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक फूड इस अतिरिक्त देखभाल में आपकी मदद कर सकते हैं. प्रोबायोटिक्ट आपके पाचन तंत्र में मौजूद सूक्ष्म जीवों के पोषण के लिए ज़रूरी होते हैं. प्रीबायोटिक गैर पाचक कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो हमारे पाचन तंत्र की अतिरिक्त देखभाल करते हैं. ये उन फूड्स में पाए जाते हैं, जिसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है.

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क्या होते हैं प्रोबायोटिक्स और क्यों जरूरी है इनका सेवन

मैक्रोबायोटिक पोषण विशेषज्ञ शिल्पा अरोड़ा के मुताबिक, प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक फूड पूरे साल अपनी डाइट में शामिल किया जाना चाहिए. वैज्ञानिक शोधों का सुझाव है कि आंतों में रहने वाले सूक्ष्मजीव हमारे स्वास्थ्य को काफी प्रभावित करते हैं. मॉनसून की वज़ह से संक्रमण और एलर्जी का ख़तरा पैदा हो जाता है. ऐसे में प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक फूड का सेवन एक प्राकृतिक बचाव की तरह काम करता है. जिससे आपकी आंतों में संक्रमण का ख़तरा कम हो जाता है.

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मानसून में क्या खाएं और क्या नहीं

1. मानसून में सेहतमंद बने रहने के लिए मॉनसून के मौसम में ज़्यादा से ज़्यादा दही का इस्तेमाल करना चाहिए. योगर्ट यानी दही प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड है, इस मौसम में आपको रोज़ाना ही एक कटोरी दही अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. दही के सेवन से आपका पाचन अच्छा रहता है. इसका सेवन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फलों के साथ या ऐसे ही किया जा सकता है.

2. फरमेंटेड सब्जियों का सेवन भी इन दिनों में लाभकारी होता है. 

3. आप नाश्ते में इडली का सेवन कर सकते हैं, जो कि आपके पाचनतंत्र के लिए बेहतर होता है. इसके साथ ही ज्यादा मात्रा में फाइबर और सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए. 

4. केला और मौसमी फल, लहसुन, प्याज भी पाचन के लिए बेहतर होता है.

5. शिल्पा कहती हैं कि प्रोसेस्ड फूड और शुगर के साथ ही उन खाद्य पदार्थों के सेवन से भी बचना चाहिए जिसमें कार्बोहाईड्रेट की मात्रा खूब होती है.

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6. साबुत अनाज में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व, प्रोटीन, फायबर, विटामिन बी, एंटीऑक्सीडेंट्स समेत कई मिनरल्स (आयरन, जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम) होते हैं. ऐसे में इनका सेवन इस मौसम में खूब किया जाना चाहिए.

7. दक्षिण भारतीय फूड प्रोबायोटिक के अच्छे स्रोत होते हैं. इनमें इडली, डोसा और खमीर युक्त खाद्य पदार्थ आपके स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर होते हैं.


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8. फरमेन्टेशन की प्रक्रिया से इसके पोषक तत्वों की मात्रा और बढ़ जाती है. ऐसे में इन फूड को अपनी डाइट में शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज़ से बेहतर होता है.

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