मोटापा, मधुमेह मेलिटस, हाइपरटेंशन, ब्रेस्ट कैंसर और डिस्लिपिडेमिया बीमारी का एक प्रमुख कारक है.

भारत में तुलनात्मक रूप से स्वस्थ राज्य माने जाने वाले दक्षित भारत में भी मोटापे से ग्रस्त आबादी तेजी से बढ़ रही है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के अनुसार, 18-49 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं में मोटापे की प्रतिशत दर एनएफएचएस-2 में 11 फीसदी से बढ़कर एनएफएचएस-3 में 15 फीसदी तक पहुंच गई है. एनएफएचएस के अनुसार, अधिक वजन व मोटापे से ग्रस्त आबादी में अधिक संख्या विवाहित महिलाओं की है, जो केरल में (34 फीसदी) सबसे ज्यादा है, इसके बाद तमिलनाडु (24.4 फीसदी), आंध्र प्रदेश (22.7 फीसदी) और कर्नाटक (17.3 फीसदी) है.
हैदराबाद के वरिष्ठ बरिएट्रिक एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. वेणुगोपाल पारीक ने कहा कि मोटापा स्वयं में एक जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन मोटापा, मधुमेह मेलिटस, हाइपरटेंशन, ब्रेस्ट कैंसर और डिस्लिपिडेमिया बीमारी का एक प्रमुख कारक है. इसलिए मोटापे से होने वाली गंभीर बीमारियों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है कि मोटापे की महामारी से बचाव के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं.
डॉ. पारीक ने कहा, "बरिएट्रिक सर्जरी मोटापे के कारण होने वाली सभी बीमारियों का एकमात्र समाधान है. चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण रोगियों का विश्वास इस प्रक्रिया पर बढ़ रहा है. यदि हम वार्षिक आंकड़ों की बात करें तो हम सालाना 80-90 मरीजों की बरिएट्रिक सर्जरी कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "बरिएट्रिक सर्जरी चार प्रकार की होती है -स्लीव गैस्ट्रक्टमी, गैस्ट्रिक बायपास, मिनी गैस्ट्रिक बायपास और गैस्ट्रिक बैंड. स्लीव गैस्ट्रक्टमी सर्जरी सबसे अधिक की जाने वाली सर्जरी प्रक्रिया है, लेकिन जिन मरीजों को टाइप टू डायबिटीज की शिकायत होती है उन्हें गैस्ट्रिक बायपास करवाने की सलाह दी जाती है. आजकल मिनी गैस्ट्रिक बायपास भी काफी प्रयोग में आ रही है."
उन्होंने कहा, "गैस्ट्रिक बैंड सर्जरी पारंपरिक प्रोसीजर है जो धीरे-धीरे प्रैक्टिस में खत्म होता जा रहा है, क्योंकि इससे अधिक प्रभावशाली प्रक्रिया उपलब्ध है. वहीं वे मरीज जो 10 से 12 किलोग्राम कम करना चाहते हैं, उनके लिए गैस्टिक ब्लून एक नॉनसर्जिकल प्रक्रिया भी उपलब्ध है. इसमें एंडोस्कोप के जरिए गैस्ट्रिक बैलून को रखा जाता है और मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है."
हैदराबाद के वरिष्ठ बरिएट्रिक एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. वेणुगोपाल पारीक ने कहा कि मोटापा स्वयं में एक जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन मोटापा, मधुमेह मेलिटस, हाइपरटेंशन, ब्रेस्ट कैंसर और डिस्लिपिडेमिया बीमारी का एक प्रमुख कारक है. इसलिए मोटापे से होने वाली गंभीर बीमारियों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है कि मोटापे की महामारी से बचाव के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं.
दिल को पसंद नहीं आपका शहर में रहना, जानिए क्यों...
सावधान! कान की खराबी दे सकती है इस बीमारी को जन्म...
डॉ. पारीक ने कहा, "बरिएट्रिक सर्जरी मोटापे के कारण होने वाली सभी बीमारियों का एकमात्र समाधान है. चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण रोगियों का विश्वास इस प्रक्रिया पर बढ़ रहा है. यदि हम वार्षिक आंकड़ों की बात करें तो हम सालाना 80-90 मरीजों की बरिएट्रिक सर्जरी कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "बरिएट्रिक सर्जरी चार प्रकार की होती है -स्लीव गैस्ट्रक्टमी, गैस्ट्रिक बायपास, मिनी गैस्ट्रिक बायपास और गैस्ट्रिक बैंड. स्लीव गैस्ट्रक्टमी सर्जरी सबसे अधिक की जाने वाली सर्जरी प्रक्रिया है, लेकिन जिन मरीजों को टाइप टू डायबिटीज की शिकायत होती है उन्हें गैस्ट्रिक बायपास करवाने की सलाह दी जाती है. आजकल मिनी गैस्ट्रिक बायपास भी काफी प्रयोग में आ रही है."
चीन में बीते साल इतनी घटी मातृ मृत्यु दर, 1.7 करोड़ बच्चों ने लिया जन्म
Promoted
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com
कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद है टेस्टोस्टेरोन थेरेपी...
उन्होंने कहा, "गैस्ट्रिक बैंड सर्जरी पारंपरिक प्रोसीजर है जो धीरे-धीरे प्रैक्टिस में खत्म होता जा रहा है, क्योंकि इससे अधिक प्रभावशाली प्रक्रिया उपलब्ध है. वहीं वे मरीज जो 10 से 12 किलोग्राम कम करना चाहते हैं, उनके लिए गैस्टिक ब्लून एक नॉनसर्जिकल प्रक्रिया भी उपलब्ध है. इसमें एंडोस्कोप के जरिए गैस्ट्रिक बैलून को रखा जाता है और मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है."
NDTV Doctor Hindi से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन और Twitter पर फॉलो करें... साथ ही पाएं सेहत से जुड़ी नई शोध और रिसर्च की खबरें, तंदुरुस्ती से जुड़े फीचर्स, यौन जीवन से जुड़ी समस्याओं के हल, चाइल्ड डेवलपमेंट, मेन्स हेल्थ, वुमन्स हेल्थ, डायबिटीज और हेल्दी लिविंग अपडेट्स.