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Lockdown में ईयरफ़ोन के ज़्यादा इस्तेमाल से बढ़ी ये नई मुसीबत! जानें क्या हैं बचाव के तरीके

वर्क फ़्रोम होम, ऑनलाइन क्लासेस, ऑनलाइन गेम, म्यूज़िक ज़्यादा सुनने जैसे कोरोना काल में बदलाव नई मुसीबत लाया है, घंटों कान में लगे ईयरफ़ोन के कारण लोगों में कान की तकलीफ़ कई गुना बढ़ी है. दर्द, फ़ंगल इंफ़ेक्शन और सुनने में तकलीफ़ के साथ लोग अस्पताल का रुख़ कर रहे हैं.

Lockdown में ईयरफ़ोन के ज़्यादा इस्तेमाल से बढ़ी ये नई मुसीबत! जानें क्या हैं बचाव के तरीके

Headphones Health Risks: लॉकडाउन हर किसी की लाइफ में अलग अनुभव लेकर आया. कुछ लोगों के लिए यह अच्छी ऑपरचुनिटी साब‍ित हुआ, तो कुछ के लिए मुसीबत. लॉकडाउन के दौरान मानसिक तनाव से जुड़े मामले काफी बढ़ गए थे. ऐसे ही सेहत से जुड़े और भी बहुत से मामले इस दौरान देखने को मिले. इसी तरह के कान की तकलीफ़ों के मामलों में कई गुना वृद्धि देखी गई. जी हां, लॉकडाउन के दौरान और इसके बाद भी कान में दर्द, फ़ंगल इंफ़ेक्शन और सुनने में तकलीफ़ जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई. 

मुंबई में फ़ोर्टिस अस्पताल की मानें तो यहां ऐसे मामले पहले के मुकाबले चार गुना ज्यादा बढ़े. वॉकहार्ट के अनुसान ईयरफ़ोन के कारण 20-30 फीसदी लोगों में कान से जुड़ी समस्याएं पैदा हुईं. इसके अलावा मुंबई का नमी भरा मौसम भी इसका कारण बना है. वहीं घंटों कान में लगे ईयरफ़ोन से इंफ़ेक्शन की एक बड़ी वजह है. 

चार गुना ज्यादा बढ़े मामले


लॉकडाउन में घरों में बंद लोगों को अब कान की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसके पीछे वर्क फ़्रोम होम, ऑनलाइन क्लासेस, ऑनलाइन गेम, म्यूज़िक ज़्यादा सुनने जैसे कोरोना काल में बदलाव नई मुसीबत लाया है, घंटों कान में लगे ईयरफ़ोन के कारण लोगों में कान की तकलीफ़ कई गुना बढ़ी है. दर्द, फ़ंगल इंफ़ेक्शन और सुनने में तकलीफ़ के साथ लोग अस्पताल का रुख़ कर रहे हैं. इस बारे में हमने बात की डॉ रेणुका ब्रडू, प्रोफ़ेसर, इएनटी हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट, सायन हॉस्पिटल से. डॉक्टर रेणुका ने कहा - ‘'इस पैंडेमिक में जब से लोग वर्क फ़्रोम होम कर रहे हैं या ऑनलाइन क्लासेस चल रहे हैं, या घर पर बैठ कर गेम खेल रहे हैं इसकी वजह से दो तीन तकलीफ़ें ज़्यादा दिख रही हैं कान दर्द, दूसरा ईयर कनैल का इंफ़ेक्शन, लोगों को साउंड का भी पता नहीं है वॉल्यूम कितना रखना है, तो सुनने की भी दिक़्क़त है लोगों में.

मौसम भी है वजह 

मुंबई में नमी यानी ह्यूमिडिटी भरा मौसम भी ऐसे संक्रमण का मुख्य कारण है, बीते कुछ हफ़्तों में कान की तकलीफ़ों के मामले फ़ोर्टिस में चार गुना तो Wockhardt में क़रीब 20-30% बढ़े हैं. इस बारे में फोर्टीज अस्पताल के इएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर संजय भाटिया का कहना है कि ‘'मुंबई का मौसम ह्यूमिडिटी भरा है उसमें फ़ंगस मोईस्चर के कारण इंफ़ेक्शन बढ़ रहे हैं. ऐसे मरीज़ हम अभी ज़्यादा देख रहे हैं, पहले OPD में 1-2 ऐसे मरीज़ होते थे वो चार गुना बढ़ गए हैं. इसके कारण से 10-20% टेम्परेरी बहरापन भी आ सकता है. आगे चल के अगर ईयरफ़ोन के ज़रिए लाउड आवाज़ में सुनते रहे तो बहरापन गहरा सकता है.''

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ENT infections in Covid-19 times: ऐसे मामले पहले के मुकाबले चार गुना ज्यादा बढ़े

वॉकहार्ट अस्पताल में कंसल्टेंट इएनटी और  हेड व नेक ऑनकॉलोजी हेड डॉक्टर शीतल राडिया का कहना है कि ‘'हमारे यहाँ हमने पाया है कि 20-30% मरीज़ों में ऐसे इंफ़ेक्शन बढ़े हैं. जो ईयर फ़ोन होता है उसके ऊपर छोटे छोटे कीटाणु लगे रहते हैं जैसे बैक्टीरीया या फ़ंगस वो हमें दिखते नहीं लेकिन जब इसका इस्तेमाल करते हैं तब हम इक्स्टर्नल सोर्स को कान में डाल रहे हैं जिससे इंफ़ेक्शन होता है.''


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क्या हैं बचाव के तरीके

एक्सपर्ट्स इससे बचने के आसान तारीके बताते हैं- 
- ब्रेक के साथ ईयर या हेड फ़ोन का इस्तेमाल करें. 
- लम्बे समय तक तेज़ आवाज़ में गाने न सुनें. 
- समय समय पर ईयर फ़ोन की सफाई करते रहें. 
- कोरोना काल में रहन-सहन के हर तौर तरीक़ों में बदलाव और सुधार की दरकार है.
 

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