होम »  लिविंग हेल्दी »  अपनों को भूल जाना जब बीमारी बन जाए तो संभलने की जरूरत, कराएं अल्जाइमर की जांच

अपनों को भूल जाना जब बीमारी बन जाए तो संभलने की जरूरत, कराएं अल्जाइमर की जांच

रोगी का रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग हैं तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें और पीड़ित को तंबाकू, मद्यपान इत्यादि व्यसनों से मुक्त करे."

अपनों को भूल जाना जब बीमारी बन जाए तो संभलने की जरूरत, कराएं अल्जाइमर की जांच

World Alzheimer''s Day 2018: जब बार-बार भूलने लगें तो डाक्टर को दिखाना चाहिए.

बीमारी ऐसी हो कि इनसान बातों को भूलने लगे, अपनों को ही पहचान न पाए और अपना दुख बता न पाए तो उसका और उसके अपनों का कष्ट कई गुना बढ़ जाता है. ऐसी ही बीमारी है अल्जाइमर. ऐसे में जब बार-बार भूलने लगें तो डाक्टर को दिखाना चाहिए. बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजुल अग्रवाल ने अल्जाइमर रोग के प्रारंभिक लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है, फोन मिलाने और किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है, कोई फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, चीजें इधर उधर रखकर भूल जाते हैं, शब्द भूलने लगते हैं, जिससे सामान्य बातचीत में रुकावट आती है, अपने घर के आसपास की गलियों, रास्तों को भूल जाते हैं और उनके रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आता है.

क्या है हर्पीस वायरस और अल्जाइमर के बीच संबंध, यहां जानें हर बात...


04hphnkg

अंतिम चरण में व्यक्ति अपनी गतिविधियों को नियंत्रण करने की क्षमता खो देता है
Photo Credit: iStock

पी.एस.आर.आई हॉस्पिटल के न्यूरोसाइंसेज विभाग के चेयरमैन डॉ. शमशेर द्विवेदी बताते हैं कि अल्जाइमर रोग के भी तीन चरण होते हैं. प्रारंभिक चरण में रोगी अपने दोस्तों और अन्य व्यक्तियों को पहचान सकता है, लेकिन उसे लगता है कि वह कुछ चीजें भूल रहा है. मध्य चरण में उसकी स्मृति के विलोप की प्रक्रिया और अन्य लक्षण धीरे-धीरे उभरने लगते हैं. अंतिम चरण में व्यक्ति अपनी गतिविधियों को नियंत्रण करने की क्षमता खो देता है और अपने दर्द के बारे में भी नहीं बता पाता. यह चरण सबसे दुखदायी है. 

याददाश्त से जुड़ी बीमारी डिमेंशिया के इलाज में मददगार हैं अल्ट्रासाउंड तरंगें...

अल्जाइमर से बचाव के बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में न्यूरो-सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सामान्यत: यह रोग वृद्धावस्था में होता है परंतु खान-पान, जीवनशैली के परिवर्तनों के कारण यह समस्या युवाओं में भी प्रकट हो रही है. इसके बचाव के लिए आपके किसी परिजन, मित्र और परिचित में ऐसे लक्षण दिखते हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें. रोग की जानकारी में ही इसका बचाव है. नियमित व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन करें. पीड़ित को अवसाद (डिप्रेशन) से बचाएं, अकेला न छोड़ें. यदि रोगी को रक्तचाप समस्या, मधुमेह, हृदय रोग हैं तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें. पीड़ित को तंबाकू, मद्यपान इत्यादि व्यसनों से मुक्त करें. 

bt54024

मध्य चरण की तो अल्जाइमर रोग का मध्म चरण आमतौर पर कई सालों तक रहता है.
Photo Credit: iStock

नारायणा सुपरस्पेशियल्टी हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी के चिकित्सक डॉ. साहिल कोहली ने कहा, "यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है. यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है. इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है. अगर बात करें मध्य चरण की तो अल्जाइमर रोग का मध्म चरण आमतौर पर कई सालों तक रहता है. जैसे-जैसे रोगी की उमर बढ़ती जाती है साथ-साथ उसकी बीमारी और भी बढ़ जाती हैं. रोग की जानकारी में ही इसका बचाव है. नियमित व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन खाएं. पीड़ित को सक्रिय और सकारात्मक रहना चाहिए. वातावरण को भी सकारात्मक बनाएं रखें. यदि रोगी का रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग हैं तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें और पीड़ित को तंबाकू, मद्यपान इत्यादि व्यसनों से मुक्त करे."

टिप्पणी

NDTV Doctor Hindi से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन और Twitter पर फॉलो करें... साथ ही पाएं सेहत से जुड़ी नई शोध और रिसर्च की खबरें, तंदुरुस्ती से जुड़े फीचर्स, यौन जीवन से जुड़ी समस्याओं के हल, चाइल्ड डेवलपमेंट, मेन्स हेल्थवुमन्स हेल्थडायबिटीज  और हेल्दी लिविंग अपडेट्स. 

................... विज्ञापन ...................

................... विज्ञापन ...................

................... विज्ञापन ...................

-------------------------------- विज्ञापन -----------------------------------