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National Dengue Day 2018: जानें क्या हैं डेंगू से जुड़ी भ्रांतियां और हकीकत..

डेंगू को दो श्रेणियों डेंगू बुखार और गंभीर डेंगू में बांटा जा सकता है. अगर मरीज में कैपलरी लीकेज हो तो उसे गंभीर डेंगू से पीड़ित माना जाता है, जबकि अगर ऐसा नहीं है तो उसे डेंगू बुखार होता है.

National Dengue Day 2018: जानें क्या हैं डेंगू से जुड़ी भ्रांतियां और हकीकत..

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  1. एक फीसदी मामलों में ही जानलेवा साबित होता है डेंगू
  2. इसे दो श्रेणियों, डेंगू बुखार और गंभीर डेंगू में बांटा जा सकता है
  3. कैपलरी लीकेत होने पर डेंगू को गंभीर श्रेणी का माना जाता है
ऐसा अक्सर होता है कि कोई बीमारी बहुत बड़े पैमाने पर लोगों को अपना शिकार बना ले, तो लोगों में उसकी दहशत फैल जाती है. इसके साथ ही फैलती हैं उससे जुड़ी गलतफहमियां... डेंगू ने जिस तरह से दहशत फैला रखी है, इससे जुड़ी भ्रांतियों और तथ्यों के बारे में जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक है. डेंगू को लेकर दहशत और अव्यवस्था फैलाने की बजाए हमें इसकी रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके रोकने के तरीकों के लिए सही समय पर कदम उठाने चाहिए. 

सभी को यह बात याद रखनी चाहिए कि केवल एक प्रतिशत मामलों में डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है. डेंगू के ज्यादातर मामलों का इलाज ओपीडी में किया जा सकता है, अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती.'

डेंगू को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियां और उनकी सच्‍चाई इस प्रकार है...

भ्रांति : डेंगू की महामारी फैल चुकी है.

तथ्य : फिलहाल दिल्ली में डेंगू फैला हुआ है लेकिन यह महामारी के स्तर तक नहीं पहुंचा है.

भ्रांति : डेंगू के सभी मामले एक जैसे होते हैं और सभी का इलाज भी एक समान होता है.

तथ्य : डेंगू को दो श्रेणियों डेंगू बुखार और गंभीर डेंगू में बांटा जा सकता है. अगर मरीज में कैपलरी लीकेज हो तो उसे गंभीर डेंगू से पीड़ित माना जाता है, जबकि अगर ऐसा नहीं है तो उसे डेंगू बुखार होता है. टाइप 2 और टाइप 4 डेंगू से लीकेज होने की ज्यादा संभावना होती है.

भ्रांति : डेंगू से पीड़ित सभी मरीजों का अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है.

तथ्य : डेंगू बुखार का इलाज ओपीडी में हो सकता है और जिन मरीजों में तीव्र पेट दर्द, टैंडरनेस, लगातार उल्टी, असंतुलित मानसिक हालात और बेहद कमजोरी है उन्हें अस्तपाल में भर्ती हो पड़ सकता है. केवल गंभीर डेंगू के मरीजों को डॉक्टर की सलाह अनुसार भर्ती होना चाहिए.

हमेशा याद रखें कि 70 प्रतिशत मामलों में डेंगू बुखार का इलाज उचित तरल आहार लेने से हो जाता है. मरीज को साफ-सुथरा 100 से 150 मिलीलीटर पानी हर घंटे देते रहना चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मरीज हर 4 से 6 घंटे में पेशाब करता रहे।

भ्रांति : एक बार डेंगू होने पर दोबारा कभी डेंगू नहीं हो सकता.

तथ्य : डेंगू की चार किस्में हैं. एक किस्म का डेंगू दोबारा नहीं हो सकता लेकिन दूसरी किस्म का डेंगू हो सकता है. दूसरी बार हुआ डेंगू पहली बार से ज्यादा गंभीर होता है. पहली बार में केवल एजीएम या एएस1 ही पाजिटिव होगा और दूसरी बार में एजीजी भी पॉजिटिव होगा.

भ्रांति : डेंगू बुखार का प्रमुख इलाज प्लेटलेट्स टरांसफ्यूजन है.

तथ्य : प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत तब होती है, जब प्लेटलेट्स की संख्या 10000 से कम होती है और ब्लीडिंग हो रही हो. ज्यादातर मामलों में प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती और यह फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है. तरल आहार देते रहना इसके इलाज का सबसे बेहतर तरीका है. जो लोग मुंह से तरल आहार नहीं ले सकते उन्हें नाड़ी से तरल आहार दिया जा सकता है.

भ्रांति : मशीन से प्राप्त प्लेट्लेट्स संख्या सटीक होती है.

तथ्य : मशीन की रीडिंग असली प्लेटलेट्स की संख्या से कम हो सकती है. प्लेटलेट्स की संख्या का यह अंतर 30000 से ज्यादा तक का हो सकता है.

भ्रांति : केवल प्लेट्लेट्स संख्या से ही डेंगू का संपूर्ण और कारगर इलाज हो सकता है.

तथ्य : प्रोगनोसिस और इनक्रीज्ड कैपिलरी परमियबिल्टी की जांच करने के लिए संपूर्ण ब्लड काउंट खास कर हीमोक्रिटिक की जरूरत पड़ती है, जो सभी समस्याओं का शुरुआती केंद्रबिंदु होता है। घटती प्लेट्लेट्स संख्या और बढ़ता हीमोक्रिटिक स्तर बेहद अहम होते हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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