उसका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था, जिसे पूरा करने में वह लगी रही. डॉक्टर बनने के बाद वह गरीबों की सेवा करेगी.

नक्सलवाद के लिए कुख्यात छत्तीसगढ़ के दोरनापाल की रहने वाली बेटी माया ने क्षेत्र की पहली एमबीबीएस डॉक्टर बनकर इतिहास रचा है. माया ने महज 10 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था. माया का कहना है कि उसने महज 10 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. उसका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था, जिसे पूरा करने में वह लगी रही. डॉक्टर बनने के बाद वह गरीबों की सेवा करेगी.
माया की बहन का कहना है कि पिताजी के निधन के बाद माया को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आर्थिक तंगी से भी गुजरना पड़ा, लेकिन माया के हौसले नहीं डगमगाए. बाधाओं से लड़ते हुए उसने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है. माया की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार उसकी कामयाबी से खुश है.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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